बेगूसराय में ट्रिपल मर्डर के दोषी को फांसी, अदालत ने बताया ‘दुर्लभतम’ मामला
बेगूसराय। 2019 में दीपावली की रात हुए चर्चित ट्रिपल मर्डर कांड में एडीजे-3 की अदालत ने आरोपी विकास कुमार को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ब्रजेश कुमार सिंह ने फैसला सुनाते हुए इस घटना को “दुर्लभतम श्रेणी का जघन्य अपराध” करार दिया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई सुनवाई में आरोपी को फांसी की सजा सुनाई गई।
आरोपी को बेऊर केंद्रीय कारा से बेगूसराय जेल लाया गया था, जहां से उसकी पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कराई गई। फैसले के बाद पीड़ित परिवार में संतोष की भावना देखी गई।
दीपावली की रात तीन हत्याएं
घटना 27 अक्टूबर 2019 की है। अभियोजन के अनुसार, विकास कुमार ने दीपावली की रात अपने ही घर में घुसकर भाई कुणाल कुमार, भाभी कंचन देवी और भतीजी सोनम कुमारी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस दौरान उसने भतीजे शिवम कुमार पर भी पिस्टल से फायरिंग की, लेकिन कारतूस खत्म हो जाने और मिसफायर के कारण शिवम की जान बच गई। इसी मामले में शिवम के आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
सरकारी अधिवक्ता (एपीपी) राम प्रकाश यादव ने बताया कि अदालत के समक्ष छह गवाहों की गवाही कराई गई, जिन्होंने घटना का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अदालत ने अपराध की प्रकृति और परिस्थितियों को देखते हुए इसे ‘रेयर ऑफ द रेयरेस्ट’ मानते हुए मृत्युदंड दिया।
पहले भी कर चुका है दो हत्याएं
अभियोजन पक्ष के अनुसार, विकास कुमार इससे पहले भी दो हत्याओं में संलिप्त रह चुका है। वर्ष 2012 में उसने अपने चाचा अरुण कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी थी, जिसमें उसे आजीवन कारावास की सजा मिली थी। बाद में 2017 में उसने उसी मामले की गवाह अपनी चाची मनी देवी की भी हत्या कर दी। चाची हत्याकांड का मामला एडीजे-4 की अदालत में विचाराधीन है।
बताया जाता है कि जमीन और संपत्ति विवाद इन सभी घटनाओं की मुख्य वजह था। अभियोजन के अनुसार, आरोपी ने संपत्ति हड़पने की नीयत से अपने ही परिवार के पांच सदस्यों की अलग-अलग घटनाओं में हत्या की।
पीड़ित परिवार की प्रतिक्रिया
मृतक कुणाल कुमार के पुत्र शिवम कुमार ने अदालत के फैसले पर संतोष जताया। उन्होंने बताया कि घटना की रात आरोपी ने उन्हें भी निशाना बनाया था, लेकिन गोली नहीं चलने से उनकी जान बच गई। शिवम ने कहा कि जमीन के लालच में उनके माता-पिता और बहन की हत्या की गई। अदालत के फैसले से उन्हें न्याय मिलने का एहसास हुआ है।