पटना
बिहार: निगरानीकी लगातार कर रही कार्रवाई, प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी और डीलर गिरफ्तार
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बेगूसराय में मंसूरचक और भगवानपुर प्रखंड के प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी शैलेंद्र कुमार सिंह तथा डीलर विद्या सागर को पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम की दुकान से जुड़े अनाज कमीशन और लाइसेंस नवीकरण के नाम पर बारह हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया। पप्पू पासवान नामक व्यक्ति की शिकायत पर निगरानी डीएसपी रंजीत कुमार निराला की टीम ने जाल बिछाकर दोनों को दबोच लिया।

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की कार्रवाई लगातार तेज है। वर्ष 2025 में ब्यूरो ने कुल एक सौ बाईस प्राथमिकी दर्ज कीं जो पिछले पच्चीस वर्षों का रिकॉर्ड है। इनमें से एक सौ एक ट्रैप मामले थे जिनमें एक सौ सात भ्रष्ट लोकसेवकों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया और सैंतीस लाख अस्सी हजार रुपये से अधिक रिश्वत राशि बरामद हुई।
वर्ष 2026 के पहले तीन महीनों में ब्यूरो ने सैंतीस प्राथमिकी दर्ज कीं जिनमें बत्तीस ट्रैप मामले शामिल हैं। इस दौरान उनतीस अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया और दस लाख उनतीस हजार रुपये की रिश्वत राशि जब्त की गई। जनवरी और फरवरी में अकेले अट्ठाईस मामले दर्ज हुए थे।
हाल के अन्य प्रमुख मामले इस प्रकार हैं। मुंगेर में प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय के पेशकार मुकेश कुमार को एक लाख सत्तर हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया। भागलपुर में एसडीएम कार्यालय के दो क्लर्कों को सत्तर हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़ा गया। वैशाली में पातेपुर थाने के एक सब इंस्पेक्टर को पंद्रह हजार रुपये रिश्वत लेते दबोचा गया। समस्तीपुर में ब्लॉक सप्लाई अधिकारी राजेश कुमार भगत को दस हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया। सुपौल में सर्वे अमीन विक्रम कुमार राम को बीस हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़ा गया।
निगरानी ब्यूरो ने दो नए कोषांग बनाने का फैसला किया है ताकि भ्रष्टाचार के मामलों में त्वरित मुकदमा चलाया जा सके और दोषसिद्धि सुनिश्चित हो। ब्यूरो का 2026 का लक्ष्य एक सौ पचहत्तर प्राथमिकी दर्ज करना है। राजस्व भूमि सुधार पंचायती राज पुलिस और स्वास्थ्य विभागों में सबसे अधिक मामले सामने आए हैं।
ये कार्रवाइयां आम शिकायतों पर सत्यापन के बाद जाल बिछाकर की जा रही हैं। बिहार सरकार की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत निगरानी ब्यूरो लगातार सक्रिय है।