नवादा में चीनी मिल फिर से शुरू होने की उम्मीद, वारसलीगंज में जमीन की तलाश तेज
पटना।
बिहार के नवादा जिले में एक बार फिर चीनी मिल चालू होने की संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। नवादा लोकसभा क्षेत्र के सांसद विवेक ठाकुर ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि वारसलीगंज में चीनी मिल स्थापित करने की दिशा में व्यवस्था देखी जा रही है। उन्होंने किसानों से सुझाव मांगे हैं और लगभग 100 एकड़ जमीन की उपलब्धता होने पर सूचना देने की अपील की है। इसके लिए उन्होंने अपना आधिकारिक व्हाट्सएप नंबर भी जारी किया है।
वारसलीगंज चीनी मिल का इतिहास
नवादा जिले के वारसलीगंज में स्थित चीनी मिल, जिसे मोहिनी शुगर वर्क्स के नाम से भी जाना जाता था, की स्थापना वर्ष 1952 में तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह द्वारा की गई थी। करीब 78 एकड़ में फैली यह मिल कभी क्षेत्र की आर्थिक रीढ़ मानी जाती थी। वारसलीगंज उस दौर में “गन्ना नगरी” के रूप में प्रसिद्ध था।
बाद में मिल एक निजी कंपनी के हाथों में चली गई, लेकिन लगातार घाटे के कारण वर्ष 1993 में इसे बंद कर दिया गया। तब से लेकर आज तक मिल लगभग 28-30 वर्षों से बंद और खंडहर अवस्था में पड़ी है।
बकाया और किसानों पर प्रभाव
मिल बंद होने के समय कर्मचारियों और किसानों का लगभग 37 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया बताया जाता है। मिल के बंद होने से हजारों किसान और मजदूर प्रभावित हुए। गन्ना उत्पादन में भारी गिरावट आई और क्षेत्र की पहचान भी बदलने लगी।
जमीन पर नई औद्योगिक पहल
वर्तमान में मिल की लगभग 70 एकड़ से अधिक जमीन पर अडानी समूह द्वारा सीमेंट फैक्ट्री स्थापना की गई। बिहार सरकार के द्वारा यह जमीन अदानी कंपनी को दिया गया था। हालांकि सीमेंट फैक्ट्री का स्थानीय लोगों ने विरोध किया।
किसानों में नई उम्मीद
ऐसे समय में सांसद विवेक ठाकुर की ओर से चीनी मिल फिर से शुरू करने की संभावना जताए जाने से किसानों में नई उम्मीद जगी है। यदि यह योजना साकार होती है तो न केवल गन्ना किसानों को राहत मिलेगी, बल्कि क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।