शेखपुरा में अनूठी परंपरा: आजादी से पहले से चली आ रही है भारत माता की दुर्गा रूप में पूजा, तिरंगे और देशभक्ति के रंग में रंगते हैं पंडाल
शेखपुरा / बरबीघा
पूरे देश में जहां दुर्गा पूजा के दौरान मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना की जाती है, वहीं शेखपुरा जिले में आस्था और राष्ट्रभक्ति का एक अनूठा संगम देखने को मिलता है। यहां के शेखपुरा और बरबीघा इलाके में एक ऐसी प्राचीन परंपरा निभाई जा रही है, जो सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान न होकर देशप्रेम की एक मिसाल बन चुकी है। यहां आजादी के पहले से ही मां दुर्गा के साथ-साथ भारत माता की विशेष रूप से पूजा करने की परंपरा चली आ रही है।
आजादी के परवानों ने शुरू की थी परंपरा
स्थानीय बुजुर्गों और इतिहास प्रेमियों के अनुसार, भारत माता की पूजा की यह परंपरा स्वतंत्रता प्राप्ति से भी पहले की है। आजादी की लड़ाई के दौरान जब पूरे देश में देशभक्ति का ज्वार उमड़ रहा था, तब स्थानीय स्वतंत्रता सेनानियों और समाज सुधारकों ने मां दुर्गा की शक्ति के साथ भारत माता की शक्ति को जोड़ने का निर्णय लिया। तब से लेकर आज तक यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही एक अखंड परंपरा बन चुकी है।
दुर्गा रूप में होती है भारत माता की आराधना
शेखपुरा और बरबीघा के कई पूजा पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमा के साथ या उनके स्वरूप में ही भारत माता की भव्य झांकियां और मूर्तियां स्थापित की जाती हैं। भक्तों के लिए यह पंडाल केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि राष्ट्र वंदना का पावन केंद्र बन जाते हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन के साथ-साथ भारत माता के चरणों में शीश झुकाकर देश की सुख-समृद्धि और अखंडता की कामना करते हैं।
तिरंगे की शान और वीर सैनिकों को सम्मान
इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सजावट और थीम होती है। पूरे पूजा परिसरों और आसपास के इलाकों को राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के बैनर, झंडों और आकर्षक रोशनी से सजाया जाता है। इसके साथ ही, कई प्रमुख पंडालों में देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले भारतीय वीर सैनिकों के कटआउट्स और झांकियां भी प्रदर्शित की जाती हैं। इसके माध्यम से युवाओं और आने वाली पीढ़ी में देश के प्रति समर्पण और सेना के प्रति सम्मान का भाव जागृत किया जाता है।
युवाओं में रहता है विशेष उत्साह
दुर्गा पूजा के इन दिनों में शेखपुरा और बरबीघा के इन पंडालों में भारी भीड़ उमड़ती है। स्थानीय युवाओं का कहना है कि यह आयोजन उन्हें अपनी संस्कृति के साथ-साथ राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों की भी याद दिलाता है। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ गूंजने वाले देशभक्ति के गीत पूरे माहौल को राष्ट्रमय बना देते हैं। धार्मिक आस्था और राष्ट्रप्रेम का यह अनूठा संगम शेखपुरा और बरबीघा को पूरे क्षेत्र में एक अलग और गौरवशाली पहचान दिलाता है।
