महाष्टमी पर पूजा पंडालों में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब
महिलाओं ने खोइछा भर मांगी सुख-समृद्धि, देर रात तक माता के दर्शन को लगी रही भीड़**
शेखपुरा
शारदीय नवरात्र की महाष्टमी पर रविवार को शेखपुरा शहर से लेकर गांवों तक दुर्गा पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। महिलाओं ने मां दुर्गा का खोइछा भरकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। सुबह आठ बजे के बाद पंडालों में भीड़ इतनी बढ़ गई कि उसे व्यवस्थित करने में पूजा समितियों को मशक्कत करनी पड़ी। दोपहर तीन बजे तक पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। शाम होते ही दर्शनार्थियों की भीड़ फिर बढ़ने लगी, जो देर रात तक जारी रही।
तिथियों को लेकर असमंजस के कारण सुबह शुरुआती घंटों में पंडालों में अपेक्षाकृत कम भीड़ थी। हालांकि, दिन चढ़ने के साथ श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ गई। महिलाओं ने चुनरी, अरवा चावल और शृंगार सामग्री अर्पित कर खोइछा भरा तथा माता से परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद मांगा।

शहर से गांवों तक उत्सवी माहौल
खांडपर, चांदनी चौक, इंदाय, गिरिहिंडा, महादेव नगर, बुधौली कदम कुआं, चकदीवान, डीएम स्कूल, कमिश्नरी बाजार, बल्लम ठाकुरबाड़ी, मड़पसौना और गोला रोड सहित विभिन्न पूजा पंडालों में भीड़ उमड़ी। हथियावां, कटारी, चाड़े, अवगिल, सिरारी, कारे, कुसुंभा, खखड़ा, कोसरा और गोसायमढ़ी में भी महाष्टमी की विशेष पूजा हुई।

भीड़ नियंत्रण के लिए मजिस्ट्रेट, पुलिसकर्मियों और स्वयंसेवकों की तैनाती की गई थी। श्रद्धालुओं की भारी संख्या से व्यवस्था बनाए रखने में कठिनाई हुई, लेकिन लोगों ने संयम बरतकर प्रशासन का सहयोग किया।
खोइछा भरने से झाड़ू खरीदने तक की परंपरा
आचार्य निरंजन पांडे के अनुसार, महाष्टमी पर महिलाएं खोइछा भरकर सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। इस दिन अनेक लोग उपवास रखते हैं और घरों में चना दाल, भात, लाल साग तथा ओल की सब्जी सहित सात्विक भोजन बनाते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, शुभ संकेत के रूप में झाड़ू खरीदने और चावल के आटे के घोल का घरों में छिड़काव करने की परंपरा भी है। ये रीति-रिवाज पीढ़ियों से क्षेत्र की लोकसंस्कृति का हिस्सा बने हुए हैं।
