हीटवेव का कहर: शेखपुरा में प्याज की फसल आधी, संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने भी जताई चिंता
शेखपुरा/नई दिल्ली, 27 अप्रैल 2026। बिहार के शेखपुरा जिले के घाटकुसुंभा क्षेत्र में भीषण गर्मी और हीटवेव का असर अब खेतों में साफ दिखने लगा है। यहां प्याज की खेती करने वाले किसान भारी नुकसान झेल रहे हैं। किसानों के अनुसार इस बार प्याज की उपज लगभग आधी रह गई है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ा है। वहीं किसानों ने व्यापारियों के द्वारा कम कीमत दिए जाने पर भी चिंता व्यक्त की।
स्थानीय बटोरा गांव के किसान डब्लू कुमार सहित कई किसानों ने बताया कि लगातार बढ़ते तापमान और लू के कारण फसल झुलस गई। दिन के साथ-साथ रात में भी तापमान अधिक रहने से प्याज की वृद्धि प्रभावित हुई, जिससे फसल का आकार छोटा रह गया और गुणवत्ता भी गिर गई है।
इस मामले में कृषि वैज्ञानिक प्रमोद कुमार ने भी माना कि यह स्थिति जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) का परिणाम है। उन्होंने कहा कि मौसम के बदलते पैटर्न और बढ़ती गर्मी के कारण खेती पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है और आने वाले समय में ऐसी समस्याएं और बढ़ सकती हैं।
इसी बीच, संयुक्त राष्ट्र की एक ताजा रिपोर्ट ने भी इस संकट को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। नई दिल्ली में जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हीटवेव कृषि मजदूरों और खासकर धान उत्पादन के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि गंगा-सिंधु (गंगा-इंडस) क्षेत्र सबसे अधिक संवेदनशील है, जहां घनी आबादी और कृषि पर निर्भरता के कारण अत्यधिक गर्मी का प्रभाव ज्यादा पड़ता है। यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) द्वारा जारी की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के वर्षों में हीटवेव की घटनाओं में तेजी से वृद्धि हुई है, जिससे फसलों, फल-सब्जियों, पशुधन और पोल्ट्री पर प्रतिकूल असर पड़ा है। वर्ष 2022 में भी असामान्य तापमान के कारण कई राज्यों—पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र—की कृषि प्रभावित हुई थी।
रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब इस वर्ष जून से सितंबर तक के मानसून में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका जताई गई है, जिससे कृषि उत्पादन पर और दबाव बढ़ सकता है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अनुसार, हीटवेव लंबे समय तक चलने वाला अत्यधिक गर्म मौसम होता है, जिसमें दिन और रात दोनों समय तापमान सामान्य से ऊपर बना रहता है।
कुल मिलाकर, शेखपुरा में प्याज की फसल को हुआ नुकसान इस बात का संकेत है कि हीटवेव और जलवायु परिवर्तन अब केवल रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहे, बल्कि जमीन पर किसानों की आजीविका के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं।