जिसे अपनों ने छोड़ा, उसे परायों ने अपनाया, चार साल के इंतजार के बाद ईरा को मिला नया परिवार
शेखपुरा :
कभी किसी कोने में बेसहारा मिली मासूम ईरा को शायद यह पता भी नहीं था कि उसकी जिंदगी में एक दिन ऐसा भी आएगा, जब कोई उसे अपनी बेटी कहकर गले लगाएगा। जिस बच्ची को उसके अपनों का साथ नसीब नहीं हुआ, उसे हजारों किलोमीटर दूर तमिलनाडु के एक दंपती ने अपना लिया। शुक्रवार को शेखपुरा में यह भावुक पल आया, जब चार वर्षों से संतान की प्रतीक्षा कर रहे दंपती को ईरा उनकी बेटी के रूप में सौंप दी गई।
विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान में पली-बढ़ी ईरा के लिए चार सितंबर का दिन उसकी जिंदगी का नया अध्याय लेकर आया। जिला पदाधिकारी शेखर आनंद की मौजूदगी में दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बालिका को दंपती को सुपुर्द किया गया। बेटी को गोद में लेते ही दंपती की खुशी देखते बन रही थी। चार वर्षों के इंतजार के बाद उनके परिवार में वह कमी पूरी हुई, जिसका उन्हें लंबे समय से इंतजार था।
ईरा के लिए भी यह सिर्फ एक दत्तक ग्रहण नहीं, बल्कि रिश्तों की नई शुरुआत है। जन्म देने वाले कौन थे, यह उसके बचपन की कहानी का अनकहा हिस्सा है, लेकिन अब उसे ऐसे माता-पिता मिले हैं, जिन्होंने उसे अपनाने के लिए लंबा इंतजार किया।
दत्तक ग्रहण की पूरी प्रक्रिया केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) के CARINGS पोर्टल और दत्तक ग्रहण विनियम, 2022 के प्रावधानों के अनुसार पूरी की गई।
सहायक निदेशक श्वेता कौर ने बताया कि चार सितंबर तक संस्थान से चार बच्चों को परिवार मिल चुका है। उन्होंने लोगों से अपील की कि कोई लावारिस बच्चा मिले तो तत्काल पुलिस या 112 पर सूचना दें। ईरा की कहानी शायद यही कहती है—रिश्ते केवल खून से नहीं बनते, कभी-कभी कोई अनजान व्यक्ति प्यार देकर अपना बन जाता है।