दीवाली में आज भी बची है परंपरा: मिट्टी के दीयों,घरेलू मिठाई सकरपाला,सतरंगा भुंजा की बिक्री

दीवाली में आज भी बची है परंपरा:मिट्टी के दीयों,घरेलू मिठाई सकरपाला,सतरंगा भुंजा की बिक्री

शेखपुरा

प्रकाश पर्व दीपावली को लेकर शहर से लेकर गांवों तक उत्सव का माहौल है। लोग पिछले एक सप्ताह से इसकी तैयारी कर रहे हैं। आज दीपोत्सव को लेकर बाज़ारों में पिछले तीन-चार दिनों से ख़रीदारों की भीड़ है। ख़रीदारों की भीड़ के कारण शेखपुरा बाजार में शुक्रवार और शनिवार दोनों दिन जाम की समस्या बनी रही। जाम की यह स्थिति शहर के मुख्य बाजार कटरा चौक,चांदनी चौक,माहुरी टोला,दल्लू चौक,बुधौली बाजार,महादेव नगर में सुबह 10 बजे से डरे संध्या आठ बजे तक रही। दीपावली को लेकर लोग घरों और प्रतिष्ठानों को रंग-बिरंगी रोशनी से सजा रहे हैं। साज-सज्जा के लिए बाजार में विभिन्न तरह के बल्बो और बिजली के उपकरण के साथ सजावट के सामाग्री उपलब्ध हैं। बाज़ारों में तहत-तरह की मिठाई भी बिक रही है,जिसे लोग खरीद-बिक्री कर रहे हैं। मगर आधुनिकता की इस दौड़ में भी लोग परंपरा को संजोये उसकी जड़ें मजबूत कर रहे हैं।

आधुनिकता के बीच दिवाली पर लोग पारंपरिक सामाग्रियों की मांग भी बढ़ रही है। घरों की रोशनी के लिए बल्बों और मोमबत्तियों के साथ पारंपरिक मिट्टी के दीयों की बिक्री भी जमकर हो रही है। सुधीर प्रजापति ने बताया पिछले कुछ वर्षों में मिट्टी की दीयों की मांग में काफी वृद्धि हुई है। मांग के अनुरूप आपूर्ति के लोग बाहर से मिट्टी के दीये मंगाने पड़ते हैं। दिवाली की मिठाइयों में पारंपरिक सकरपाला की भी खूब बिक्री हो रही है। लोग महंगी काजू केतली के साथ गेंहू के आटे से बने खंटीघेरलु मिठाई सकरपाला और चना के बेसन से बने पारंपरिक लड्डू की जमकर ख़रीदारी कर रहे हैं। परंपरा के तहत सतरंगा भूंजा की बिक्री भी जमकर हो रही है। लोग घरों में घरौंदा पूजा के लिए सात तरह के अनाज का भूंजा खरीदते हैं। दिवाली में दुकान लगाने वाले सुमन हलवाई ने बताया पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार भूंजा,सकरपाला,लड्डू,बूंदिया की कीमत में 50 से 80 रुपये की वृद्धि है।

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