परिवहन कार्यालय में रिश्वतखोरी से त्रस्त थे लोग, 15 हजार लेते क्लर्क गिरफ्तार
ट्रैक्टर के स्वामित्व में नाम बदलने के लिए मांगी थी रकम, निगरानी की कार्रवाई से कार्यालय में मचा हड़कंप
शेखपुरा।
जिला परिवहन कार्यालय में काम कराने के नाम पर कथित रिश्वतखोरी से परेशान लोगों के बीच मंगलवार को निगरानी की कार्रवाई ने हलचल पैदा कर दी। पटना से पहुंची निगरानी विभाग की टीम ने कार्यालय में छापेमारी कर 15 हजार रुपये रिश्वत लेते निम्नवर्गीय लिपिक कुणाल कुमार को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के बाद परिवहन कार्यालय की कार्यप्रणाली और वहां आम लोगों के काम कराने के तौर-तरीकों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
निगरानी के विशेष पुलिस उपाधीक्षक राजेंद्र प्रसाद के नेतृत्व में हुई कार्रवाई में टीम ने कुणाल कुमार को उस समय गिरफ्तार किया, जब वह डीहा गांव निवासी किसान राजू सिंह से 15 हजार रुपये ले रहा था। निगरानी के अनुसार, राजू सिंह के ट्रैक्टर के स्वामित्व में नाम परिवर्तन के लिए लिपिक ने रिश्वत की मांग की थी।
रिश्वत मांगे जाने की शिकायत किसान ने निगरानी थाना में की थी। शिकायत के सत्यापन के बाद निगरानी टीम ने कार्रवाई की रणनीति बनाई। मंगलवार को टीम परिवहन कार्यालय पहुंची और रिश्वत की रकम लेते ही कुणाल कुमार को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार कर्मी बरबीघा के सर्वा गांव का निवासी बताया गया है।
कार्रवाई के बाद निगरानी टीम उसे अपने साथ पटना ले गई, जहां न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।
परिवहन कार्यालय में हुई कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या रिश्वतखोरी का यह मामला केवल एक कर्मी तक सीमित है? कार्यालय में छोटे-छोटे काम के लिए लोगों को कथित रूप से परेशान किए जाने और बिना लेन-देन काम नहीं होने की चर्चाएं लंबे समय से सामने आती रही हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
निगरानी की कार्रवाई के बाद कार्यालय में काम कराने पहुंचे लोगों के बीच भी चर्चा रही कि गिरफ्तार लिपिक कहीं बड़े तंत्र की महज एक कड़ी तो नहीं। अब निगरानी की जांच किस स्तर तक पहुंचती है और इस मामले में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है या नहीं, इस पर नजर रहेगी।
छापेमारी की खबर फैलते ही जिले के अन्य सरकारी कार्यालयों में भी हड़कंप की स्थिति देखी गई।