विधानसभा में फिर गूंजा ‘भूमिहार ब्राह्मण’ का मुद्दा, सरकारी अभिलेखों में पहचान को लेकर उठी मांग 

 विधानसभा में फिर गूंजा ‘भूमिहार ब्राह्मण’ का मुद्दा, सरकारी अभिलेखों में पहचान को लेकर उठी मांग 

 पटना।

बिहार विधानसभा के मानसून सत्र में एक बार फिर ‘भूमिहार’ बनाम ‘भूमिहार ब्राह्मण’ की पहचान का मुद्दा गूंजा। भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री जीवेश मिश्रा ने सरकार का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराते हुए मांग की कि सरकारी दस्तावेजों, जाति प्रमाण पत्रों और अन्य अभिलेखों में समुदाय का नाम  ‘भूमिहार ब्राह्मण’  दर्ज किया जाए। उनका कहना था कि वर्तमान में अलग-अलग सरकारी अभिलेखों में नाम को लेकर विसंगतियां होने से भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

जीवेश मिश्रा ने सदन में कहा कि 1931 की जनगणना, पुराने भू-राजस्व अभिलेखों, जिला गजेटियर तथा अन्य सरकारी रिकॉर्ड में समुदाय का उल्लेख  ‘भूमिहार ब्राह्मण’  के रूप में मिलता है। जबकि बिहार सरकार के वर्ष 2023 के जातीय सर्वेक्षण तथा कई जाति प्रमाण पत्रों में केवल  ‘भूमिहार’  अंकित किया गया है। उन्होंने सरकार से इस विसंगति को दूर करने की मांग की।

दरअसल, वर्ष 2023 में कराए गए बिहार जातीय सर्वेक्षण के बाद यह विवाद फिर से चर्चा में आया। भूमिहार समाज के कई संगठनों का आरोप है कि सर्वेक्षण के दौरान समुदाय को अलग-अलग नामों से दर्ज किए जाने से उनकी पारंपरिक पहचान और वास्तविक आबादी प्रभावित हुई। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि ऐतिहासिक दस्तावेजों और पुराने खतियानों में उनकी पहचान ‘भूमिहार ब्राह्मण’ के रूप में दर्ज रही है, इसलिए सरकारी रिकॉर्ड में भी उसी नाम का उपयोग होना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में तत्कालीन राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने भी राजस्व अभिलेखों और विभागीय ऑनलाइन पोर्टल में  ‘भूमिहार ब्राह्मण’  विकल्प जोड़ने के निर्देश दिए थे। अब विधानसभा में यह मुद्दा फिर उठने के बाद सरकार के रुख पर सभी की नजरें टिकी हैं। हालांकि, इस विषय पर सरकार की ओर से अंतिम निर्णय लिया जाना अभी शेष है।

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