नीट पेपर लीक के बाद नंदन नीलकेणी के नेतृत्व में टास्क फोर्स: क्या परीक्षा व्यवस्था में आएगा बड़ा बदलाव?
नई दिल्ली
देशभर में नीट-यूजी 2026 पेपर लीक को लेकर उठे व्यापक विरोध और परीक्षा प्रणाली पर सवालों के बीच केंद्र सरकार ने परीक्षा सुधार के लिए एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की है। इस टास्क फोर्स की कमान आधार परियोजना के प्रमुख वास्तुकार और इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलकेणी को सौंपी गई है। सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को तकनीक आधारित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है।
इस फैसले को नीट पेपर लीक प्रकरण के बाद सरकार का सबसे बड़ा सुधारात्मक कदम माना जा रहा है। जांच एजेंसियों की कार्रवाई में महाराष्ट्र के पुणे सहित कई स्थानों से आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। सीबीआई की जांच में प्रश्नपत्र लीक, कोचिंग नेटवर्क, डिजिटल माध्यमों और धन के लेन-देन के कई पहलू सामने आए हैं।
नंदन नीलकेणी की पहचान बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने और सुरक्षित पहचान प्रणाली तैयार करने के लिए रही है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि नई व्यवस्था में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा एनालिटिक्स, एन्क्रिप्टेड प्रश्नपत्र वितरण, डिजिटल निगरानी और रियल-टाइम ट्रैकिंग जैसी तकनीकों का व्यापक उपयोग होगा। इससे परीक्षा प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप कम करने और लीक की संभावनाओं को न्यूनतम करने का प्रयास किया जाएगा।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल तकनीक से समस्या का समाधान नहीं होगा। परीक्षा संचालन से जुड़े अधिकारियों की जवाबदेही, कोचिंग माफिया पर सख्त कार्रवाई, राज्यों और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय तथा कठोर कानूनी व्यवस्था भी उतनी ही आवश्यक है।
कुल मिलाकर, यह टास्क फोर्स केवल नीट ही नहीं बल्कि देश की पूरी सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार इसकी सिफारिशों को कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से लागू करती है।
टास्क फोर्स में इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ को भी शामिल किया गया है। चंद्रयान-3 और आदित्य-एल1 जैसे मिशनों का नेतृत्व कर चुके सोमनाथ जटिल तकनीकी परियोजनाओं और गुणवत्ता नियंत्रण के विशेषज्ञ माने जाते हैं। वहीं, इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व निदेशक तपन डेका राष्ट्रीय सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और संगठित अपराध पर अपने अनुभव के आधार पर परीक्षा सुरक्षा को मजबूत बनाने में योगदान देंगे।
समिति के सदस्य प्रो. वी. कामकोटी, जो आईआईटी मद्रास के निदेशक हैं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और कंप्यूटर विज्ञान के विशेषज्ञ हैं। पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल शिक्षा प्रशासन और परीक्षा प्रबंधन के क्षेत्र में लंबे अनुभव के कारण समिति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमृत लाल मीणा प्रशासनिक व्यवस्था, परीक्षा केंद्रों के संचालन और लॉजिस्टिक्स से जुड़े सुधारों पर अपनी विशेषज्ञता देंगे।
टास्क फोर्स के प्रमुख सदस्य
1. नंदन नीलकेणी – अध्यक्ष
इंफोसिस के सह-संस्थापक
आधार (UIDAI) परियोजना के प्रमुख वास्तुकार
डिजिटल गवर्नेंस और टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ
2. डॉ. एस. सोमनाथ
इसरो (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष
अंतरिक्ष विज्ञान एवं उच्च तकनीक के विशेषज्ञ
3. तपन डेका
इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के पूर्व निदेशक
राष्ट्रीय सुरक्षा और साइबर सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ
4. प्रो. वी. कामकोटी
आईआईटी मद्रास (IIT Madras) के निदेशक
कंप्यूटर विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल तकनीक के विशेषज्ञ
5. अनीता करवाल
शिक्षा मंत्रालय की पूर्व सचिव
स्कूली शिक्षा एवं परीक्षा प्रशासन का लंबा अनुभव
6. अमृत लाल मीणा
लॉजिस्टिक्स और प्रशासनिक प्रबंधन के विशेषज्ञ
बड़े पैमाने पर परीक्षा संचालन और प्रशासनिक व्यवस्था का अनुभव रखते हैं।